रांची, दिसम्बर 12 -- रांची, वरीय संवाददाता। आदिवासी परंपरा छोड़ चुके हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध-जैन को डिलिस्टिंग करने की मांग की गई। इसे लेकर केंद्रीय सरना समिति ने लोकभवन के सामने शुक्रवार को धरना दिया। समिति की महिला मोर्चा अध्यक्ष निशा भगत ने डिलिस्टिंग की मांग के समर्थन में मुंडन कराया और केश को राष्ट्रपति को भेजने का ऐलान किया। समिति अध्यक्ष फूलचंद तिर्की ने कहा कि आज प्रकृति के पुजारी सरना आदिवासी जो परंपरागत संस्कृति का पालन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुरमी आदिवासियों का लाभ लेने के लिए तैयार बैठे हैं। वहीं, ईसाई समुदाय पहले से ही एसटी का लाभ लेकर मूल आदिवासियों के अधिकारों का अतिक्रमण कर रहे हैं। केंद्रीय प्रवक्ता एंजेल लकड़ा ने कहा कि आदिवासियों के हक, धार्मिक और संस्कृति पहचान को बचाए रखने के लिए जागरुकता अभियान जारी रहेगा...