देहरादून, जनवरी 31 -- देहरादून। डायबिटीज के मरीजों में आंखों की रोशनी जाने (डायबिटिक रेटिनोपैथी) का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। इससे बचने के लिए शुरुआती पहचान और नियमित जांच बेहद जरूरी है। कंसलटेंट ऑप्थल्मोलॉजिस्ट डॉ. बीएम विनोद कुमार और डॉ. सोनल बंगवाल ने शनिवार को कहा कि अनियंत्रित शुगर रेटिना की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाती है। बीमारी की शुरुआत में लक्षण नहीं दिखते, इसलिए शुगर मरीजों को साल में एक बार आंखों की पूरी जांच करानी चाहिए। डॉ. सोनल बंगवाल ने बताया कि समय रहते मोतियाबिंद की सर्जरी कराने से डायबिटिक मरीजों की दृष्टि को बेहतर बचाया जा सकता है। दोनों विशेषज्ञों ने शुगर कंट्रोल रखने और आधुनिक उपचार तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया।
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