जमशेदपुर, फरवरी 22 -- डायन प्रथा के खिलाफ लंबी और साहसिक लड़ाई लड़ने वाले सोनारी निवासी समाजसेवी प्रेमचंद का शुक्रवार सुबह निधन हो गया। लगभग 70 वर्षीय प्रेमचंद ने टाटा मुख्य अस्पताल (टीएमएच) में अंतिम सांस ली। उनके निधन से सामाजिक कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार से जुड़े लोगों में गहरा शोक है। अविवाहित प्रेमचंद ने अपना पूरा जीवन अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ संघर्ष में समर्पित कर दिया। 1991 में जमशेदपुर से डायन प्रथा के विरुद्ध पहली संगठित आवाज उठाने वाले प्रेमचंद ने सोनारी में फ्री लीगल एड कमेटी (फ्लैक) की स्थापना की। इस संस्था के माध्यम से उन्होंने डायन बताकर प्रताड़ित महिलाओं को कानूनी सहायता, पुनर्वास और सामाजिक सम्मान दिलाने का अभियान चलाया। फ्लैक ने यूनिसेफ के सहयोग से जागरूकता अभियान भी चलाए और कई बार जानलेवा हमलों तथा धमकियो...