नई दिल्ली, नवम्बर 10 -- सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पूछा कि केंद्र उसी ट्रिब्यूनल सुधार कानून को कैसे लागू कर सकता है, जिसके कई प्रावधानों को उसने पहले ही रद्द कर दिया था, कुछ मामूली बदलावों के साथ और वह भी फैसले के आधार को बदले बिना। मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ मद्रास बार एसोसिएशन द्वारा दायर याचिका सहित कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाओं में ट्रिब्यूनल सुधार (सुव्यवस्थीकरण और सेवा शर्तें) अधिनियम, 2021 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी। मुद्दा यह है कि संसद उसी कानून को मामूली बदलावों के साथ कैसे लागू कर सकती है, जिसे रद्द कर दिया गया था। मुख्य न्यायाधीश ने यह टिप्पणी तब की जब अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने पीठ से आग्रह किया कि संसद को अपने अनुभव के आधार पर कानून बनाने से नहीं रोका जा सकता।...
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