धनबाद, फरवरी 25 -- टाटा भेलाटांड़ स्थित नर्मदेश्वर शिव मंदिर प्रांगण में आयोजित श्रीश्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ में पहुंचे मुख्याचार्य रविंद्र शास्त्री ने अपने अध्यातिमक प्रवचन में कहा कि पुत कुपूत हो सकता है, लेकिन माता कुमाता नहीं हो सकती है। माता अपनी संतान के परवरिश करने में कोई कमी नहीं रखती है। इसलिए माता हमेशा से पूजनीय रही है। कहा कि जितना पुण्य धार्मिक स्थलों पर घुम घुम कर पूजा करने से होता है, उतना पूण्य यज्ञ मंडप के परिक्रमा से होती है। जहां यज्ञ होता है, वहां सभी देवी-देवताओं का वास होता है। इसलिए जितना संभव हो यज्ञ मंडप की परिक्रमा व पूजन अवश्य करना चाहिए। दान पुण्य जीवन को श्रेष्ठतम बनाता है। इधर सुबह होते ही महिला पुरूष युवक युवती हाथों में पूजन सामग्री लेकर यज्ञ मंडप की परिक्रमा किया। कई युवक युवतियों ने संकल्प के साथ निर्...