घाटशिला, नवम्बर 6 -- पोटका, संवाददाता। लुप्त हो रही आदिम जनजाति समुदाय देश की सांस्कृतिक और सामाजिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा है। केंद्र और राज्य सरकार आदिम जनजाति के उत्थान के प्रति संवेदनशील है, लेकिन प्रखंड स्तर पर इस समुदाय के उत्थान का प्रयास दम तोड़ रहा है। ऐसा ही उदाहरण प्रखंड के टांगराइन पंचायत के सबर टोला के सबर परिवार लूडू सबर, गुरुवारी सबर का है। यह परिवार किसी तरह पेट भरने के लिए आहार, तन ढंकने के लिए वस्त्र का जुगाड़ तो कर लेते हैं मगर प्लास्टिक की छावनी में रात बिताने को मजबूर हैं। लूडू सबर की पत्नी गुरुवारी सबर कहती है कि पहले वे पति लूडू सबर एवं दो पुत्र आकाश व बदल के साथ पुराने मकान में रहते थे। भारी बारिश पर टीना शेड छावनी के शीटस में जंग लगकर टूट जाने से अब वहां रहना उनके लिए संभव नहीं हुआ। फलस्वरूप वे वर्तमान में सामने ही...
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