लखनऊ, दिसम्बर 21 -- लखनऊ, विशेष संवाददाता। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने पावर कॉरपोरेशन पर झूठे आंकड़े देकर डराने का आरोप लगाया है। संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहा कि झूठे आंकड़ों के बूते निजीकरण नहीं होने दिया जाएगा। जब तक निजीकरण का प्रस्ताव रद्द नहीं हो जाता बिजली कर्मचारी और अभियंता आंदोलनरत रहेंगे। संघर्ष समिति ने कहा कि वर्ष 2024 - 25 में बिजली वितरण निगमों का कुल खर्च 1,08,877.45 करोड़ रुपये था। 86,183.29 करोड़ रुपये की राजस्व वसूली हुई और 17,100 करोड़ रुपये सरकार से सब्सिडी मिली यानी कुल राजस्व 103283.29 करोड़ रुपये हुआ। खर्च और कुल राजस्व में मात्र 7,710.04 करोड़ रुपये का अंतर है। वहीं, पावर कॉरपोरेशन अध्यक्ष 55,000 करोड़ रुपये का घाटा बताते हुए निजीकरण की धमकी दे रहे हैं। बिजली कर्मचारी, उपभोक्ता और किसान न...