नई दिल्ली, दिसम्बर 20 -- हिंदू ज्योतिष और धार्मिक परंपराओं में पुरुषों का कान छिदवाना और बाली पहनना मुख्य रूप से शुभ माना जाता है। कर्णवेध संस्कार हिंदू धर्म के षोडश संस्कारों में से एक है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कान छिदवाने से राहु-केतु के दुष्प्रभाव कम होते हैं, बुद्धि बढ़ती है और स्वास्थ्य लाभ मिलता है। हालांकि, कुछ मान्यताओं में एक कान छिदवाना या गलत धातु की बाली पहनना अशुभ हो सकता है। आधुनिक समय में यह फैशन भी है, लेकिन शास्त्रों में इसका गहरा महत्व है। आइए विस्तार से समझते हैं।कर्णवेध संस्कार का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में कर्णवेध नवम संस्कार है। पुरुषों के लिए यह बहुत शुभ है। ज्योतिष के अनुसार, कान केतु ग्रह से जुड़े हैं। कान छिदवाने से केतु और राहु के बुरे प्रभाव कम होते हैं। इससे व्यक्ति की सोचने...
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