लखनऊ, अप्रैल 24 -- लखनऊ विश्वविद्यालय के ज्योतिर्विज्ञान विभाग में वास्तुशास्त्र के शास्त्रीय सिद्धान्तों का व्यावहारिक उपयोग पर व्याख्यान हुआ। मुख्य वक्ता वास्तुशास्त्र के अजय गौर ने बताया कि वास्तुशास्त्र भारतीय ज्ञान परम्परा का अभिन्न अंग है। प्राचीन भारतीय ऋषि-मुनियों ने बहुत ही सूक्ष्मरूप से पंचतत्त्वों के शरीर और मन पर प्रभाव का अध्ययन कर इस शास्त्र का निर्माण किया है। विशिष्ट वक्ता अजय गौर ने कहा कि वास्तु और ज्योतिष एक दूसरे के पूरक है। वास्तु में एक शब्द दिक्काल यानि दिक और काल आता है। दिक् का अर्थ दिशा और काल का समय होता है। ज्योतिष में समय का ज्ञान किया जाता है और वास्तु में दिशाओं पर अध्ययन किया जाता है। कहा कि यदि किसी की जन्मपत्री में सूर्य लग्न में हो तो जातक के घर में ऊर्जा पूर्व की दिशा से आए यानी पूर्व दिशा में खुला होगा...
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