नई दिल्ली, दिसम्बर 10 -- पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जेआईटीएफ अर्बन वेस्ट मैनेजमेंट (जालंधर) लिमिटेड के पक्ष में 296 करोड़ रुपये से अधिक के मध्यस्थता निर्णय को बरकरार रखते हुए जालंधर और मोगा नगर निगमों द्वारा दायर अपीलों को खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति संजीव बेरी की पीठ ने कहा कि सरकारी निकायों को मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 के तहत विशेष व्यवहार नहीं मिल सकता है और निर्णय पर रोक लगाने की मांग करते समय उन्हें निजी पक्षों के समान नियमों का पालन करना होगा। जेआईटीएफ ने 2011 में जालंधर और फिरोजपुर नगर निगमों के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन परियोजना के लिए दोनों नगर निकायों के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे। बाद में विवाद उत्पन्न हुए और मामला मध्यस्थता के लिए चला गया। जनवरी 2022 में, मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने जालंधर नगर निगम क...