ललितपुर, अक्टूबर 29 -- जैन अटामंदिर में वैज्ञानिक संत आचार्यश्री निर्भय सागर महाराज ने कहा कि हमें अपनी आत्मा को पवित्र बनाना चाहिए, जिससे परमात्मा अपनी आत्मा में प्रकट हो सकें। जीवन में विधान ही पुण्य का कारण है। जहां बोलने से धर्म की रक्षा होती हो, प्राणियों का उपकार होता हो, वहां बिना पूछे ही बोलना और जहां आपका हित नहीं हो, वहां मौन ही रहना उचित है। उन्होंने कहा जो व्यक्ति दूसरों की निंदा आलोचना करता है, वह दूसरों की आत्मा रूपी घर को तो साफ कर रहा है लेकिन अपनी आत्मा रूपी घर में सारा कचरा भर रहा है। जैन अटा मंदिर में वैज्ञानिक संत आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज के सानिध्य में सिद्धचक महामण्डल विधान में सिद्धों की आराधना करने का पुण्यार्जन वीरचंद विपिन सरार्फ परिवार को हुआ। विधान के शुभारम्भ पर श्रावक श्राविकाओं ने आयोजन स्थल से घटयात्र...
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