पूर्णिया, दिसम्बर 9 -- पूर्णिया, हिन्दुस्तान संवाददाता। मो यूनुस के लिए जून 2025 की वह रात शायद कभी भुलाई नहीं जा सकेगी। जब उनके बेटे का जन्म हुआ और उस नन्हीं जान ने रोने से इनकार कर दिया, तो समय थम सा गया था। जन्म के बाद आधा घंटा का वह इंतजार यूनुस के लिए सदी जैसा लंबा था। लेकिन, यही वह क्षण था जब सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली की मानवीय संवेदनशीलता सामने आई। गाँव के अस्पताल की एएनएम ने स्थिति की गंभीरता को समझा और तुरंत बच्चे को पूर्णिया के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में भेजने की सलाह दी। मो यूनुस के दिल में दहशत थी, लेकिन पूर्णिया राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (जीएमसीएच) के इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टरों की तत्परता ने उस डर को उम्मीद में बदल दिया। यूनुस ने अपनी आवाज़ में भावनात्मक उतार-चढ़ाव के साथ बताया, इमरजेंसी में डॉक...
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