मोतिहारी, दिसम्बर 13 -- मोतिहारी,विधि संवाददाता। जिस व्यवस्था से मन को संतोष मिले, वहीं न्याय है। आज राष्ट्रीय लोक अदालत त्वरित न्याय देने का माध्यम बन गया है। समय के साथ समझौता कर लेना सबसे बड़ी बुद्धिमानी है। किसी को माफ कर देना अपने सिर से बोझ उतारने का प्रतिक है। राष्ट्रीय लोक अदालत में मामले निष्पादन के बाद पक्षकार अपना सिर ऊंचा करके जाते हैं। इसी उद्देश्य को राष्ट्रीय लोक अदालत पूरी करती है। उक्त बातें शनिवार को न्यायालय परिसर में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत के उद्घाटन संबोधन में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष आशुतोष कुमार दास ने कही। वहीं प्राधिकार के उपाध्यक्ष सह जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ा है। इसके लिए न्यायालय का कार्य बहुत ही सराहनीय ...