वाराणसी, मई 11 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। हमारे अनेक आचार्यों एवं अन्वेषकों ने कठिन परिश्रम करके ज्ञान अर्जित किया। यही ज्ञान सभ्यता, समाज को उन्नत करती है। आज का समाज ज्ञान का समाज है। जिसके पास ज्ञान तंत्र है वह सबसे धनी है। ये बातें बीएचयू के अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र के निदेशक प्रो. पीएन सिंह ने कहीं। वह रविवार को हरिश्चंद्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित संगोष्ठी के मुख्य अतिथि थे। 'आंतरिक गुणवत्ता एवं अनुसंधान और विकास प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित 'रिसर्च मेथडोलॉजी विषयक संगोष्ठी में उन्होंने कहा कि हमें वैश्विक स्पर्धा में आने की आवश्यकता है। नैतिकता को जीवित रखना आवश्यक है। जब तक नैतिक बोध विकसित नहीं होगा तब तक उत्तम कार्य संभव नहीं होगा। विश्व के कल्याण के लिए शोध में नवाचार, शुद्धता एवं परिसंगतता, तर्कसंगतता होनी...
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