बुलंदशहर, दिसम्बर 2 -- कभी किसी ने अपनी बेटी की शादी के लिए तो किसी ने बुढ़ापे की जरूरतों के लिए एक-एक पाई बचाई। वही रकम आज बैंकों की तिजोरियों में पड़ी हुई है। वक्त बदला, खाते भुला दिए गए और मेहनत की कमाई अनजान अमानत बन गई। जिले के बैंक शाखाओं के आंकड़ों पर गौर करें तो जनपद में अब वही रकम करीब 25 करोड़ तक पहुंच चुकी है। मंगलवार को हिन्दुस्तान ने जब इसकी पड़ताल की तो बैंक शाखाओं की रिपोर्ट कहती है कि जिले के अलग-अलग बैंकों में 555 निष्क्रिय खाते हैं। जहां पिछले 10 साल या उससे ज़्यादा समय से किसी ने एक रुपया भी नहीं निकाला। फिलहाल आरबीआई की तरफ से एक नई पहल जारी करते हुए उम्मीद की एक नई किरण जगाई है। रिज़र्व बैंक ने देशभर में 'आपकी पूंजी, आपका अधिकार' अभियान शुरू किया है, ताकि लोग अपनी भूली-बिसरी पूंजी के फिर से मालिक बन सकें। एलडीएम धीरज ...