मुंगेर, जनवरी 7 -- मुंगेर /एक संवाददाता जिले की नदियां आज केवल जलधाराएं नहीं रहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन, जैव विविधता और मानव स्वास्थ्य की जीवनरेखा हैं। लेकिन बीते कुछ वर्षों में लगातार सूखती और सिकुड़ती नदियों ने पूरे जिले एवं सभी प्रखंडों में गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। इसका असर केवल जलीय जीवों तक सीमित नहीं, बल्कि खेती, मौसम, हरियाली, तापमान और आम लोगों के स्वास्थ्य पर भी साफ दिखाई देने लगा है। नदियों के सूखने से बिगड़ता पर्यावरण संतुलन: पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, नदियों में पानी की कमी से वाष्पीकरण की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। इसका सीधा असर वर्षा चक्र पर पड़ता है। समय पर बारिश नहीं होना, भीषण गर्मी के दौरान तापमान का असामान्य रूप से बढ़ जाना और लंबे सूखे की स्थिति इसी का परिणाम मानी जा रही है। जिले के टेटिया बंबर प्रखंड निवा...
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