संभल, जनवरी 2 -- चन्दौसी। समुद्र पार करने में सभी वानर डर रहे थे। जब जामवंत ने हनुमान जी को उनका बल याद दिलाया तो वह एक ही छलांग में समुद्र पार कर गए। यह कथा व्यास शिव शंकर भारद्वाज ने श्री हनुमान कथा के दौरान व्यक्त किए। खातियान मुहल्ले के शिवपंचायत मंदिर में चल रही श्री हनुमान कथा के तीसरे दिन कथाव्यास ने हनुमान के सागर पार जाने के प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सभी योद्धा अपने बल का बखान कर रहे थे। अंगद ने कहा कि वह पार तो जा सकते हैं, लेकिन वापस आने में संशय है। जामवंत ने कहा कि संशय से ग्रस्त व्यक्ति से कार्य पूरा होने की आशा नहीं की जा सकती । जो कर्म पूर्ण कर सकते हैं, वे चुप बैठे हैं। तब जामवंत ने हनुमान की ओर देखा और कहा कि हनुमान का अवतार ही राम काज के लिए हुआ है। यह सुनते ही हनुमान सोने के पहाड़ की तरह विशाल हो गए और कहने...