नई दिल्ली, जनवरी 13 -- मकर संक्रांति के दिन आसमान पूरी तरह से पतंगों से ढक जाता है। इस त्योहार के नजदीक आते ही पतंगों की ब्रिकी तेज हो जाती है। हालांकि, पतंगबाजी का उल्लास कभी-कभी दुखद हादसों में भी बदल जाता है, खास तौर से तब, जब पतंग में चीनी मांझे का प्रयोग किया जाता है। बीते कई दिनों से चीनी मांझे को लेकर कई घटनाएं सुर्खियों में रहीं। कहीं इसकी वजह से इंसान चोटिल हुए, तो कहीं पशु- पक्षी। इस मांझे से दोपहिया वाहन चालकों के गला कटने की घटनाएं भी हुई हैं। इस तरह के कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन प्रशासन शिथिल बना हुआ है। कहने के लिए इस मांझे का प्रयोग प्रतिबंधित है। शहरों में और दुकानों में इसको लेकर 'सर्च अभियान' भी चलाया जाता है, पर यह समझ से परे है कि इस तरह की 'निगरानी' के बावजूद लोगों तक यह जानलेवा मांझा कैसे पहुंच रहा है? साफ है, कहीं ...
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