वाराणसी, फरवरी 7 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। गायन, वादन, नृत्य और साहित्य के साधकों की सतत प्रस्तुतियों से जागृत हो चुके सुबह-ए-बनारस आनंद कानन के मंच पर शनिवार को नाट्य के विविध रंग निखरे। संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित सुर साधना शृंखला के अंतर्गत कामायनी संस्था के कलाकारों ने 'अश्वत्थामा हतो, नरो वा, कुंजरो वा' का प्रभावी मंचन किया। प्रो. श्याम मोहन अस्थाना द्वारा लिखित नाटक में निर्देशक अमलेश श्रीवास्तव ने स्वयं युधिष्ठिर के अंतर्द्वंद्व को प्रभावी ढंग से अभिनीत किया। युवा अभिनेता अमन श्रीवास्तव ने अश्वत्थामा की भूमिका के चरित्र को न केवल जीवंत किया बल्कि मुख्य पात्र के रूप में स्वयं को स्थापित किया। अनुभवी अभिनेत्री कुसुम मिश्रा ने द्रौपदी के जीवन के विविध रंगों को अपने अभिनय से निखारा। श्रीकृष्ण की भूमिका में भाष्कर मिश्र का अभिनय स...