जामताड़ा, जनवरी 3 -- जल,जंगल,जमीन अब गांव के हाथ में,पेसा कानून की अधिसूचना जारी जामताड़ा, प्रतिनिधि। झारखंड में पेसा अधिनियम की अधिसूचना जारी होते ही आदिवासी समाज में उत्साह की लहर दौड़ गई है। माझी हड़ाम, नायकी और अन्य पारंपरिक पदधारकों ने इसे अपने अधिकारों की वापसी के रूप में स्वागत किया। आदिवासी इसे सोहराय पर्व का तोहफा मान रहे हैं। जहां आदिवासी नेताओं का कहना है कि अब गांव के संसाधनों पर उनका वास्तविक अधिकार होगा और जल-जंगल-ज़मीन की सुरक्षा सीधे गांववालों के हाथ में होगी। पारंपरिक आदिवासी स्वशासन व्यवस्था मे आठ पद होते हैं। जिनमें मांझी हड़ाम - संरक्षक एवं मुख्य कार्यकारी,पराणिक - उप मांझी या मांझी हड़ाम के सहयोगी,जोग मांझी - गांव के बुजुर्गों का संरक्षक और सांस्कृतिक गुरु,जोग पराणिक - जोग मांझी की अनुपस्थिति में उसके दायित्वों का निर्...
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