धर्मशाला, जनवरी 27 -- जम्मू-कश्मीर की विभिन्न समस्यायों के पीछे दुष्प्रचार अभियान का अहम रोल रहा है। अधिमिलन-प्रक्रिया के बारे में संदेह पैदा करने से लेकर महाराजा हरिसिंह और शेख अब्दुल्ला की छवियों के निर्माण तक में दुष्प्रचार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि जम्मू-कश्मीर सम्बंधी विमर्श को तथ्यपूर्ण बनाया जाए। ये बातें जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के मीडिया अध्ययन विभाग की प्रो. शुचि यादव ने कहीं। वह हिमाचल प्रदेश केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कश्मीर अध्ययन केन्द्र द्वारा विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित 'जम्मू-कश्मीर में मीडिया' विषय पर बोल रहीं थीं। प्रो. यादव ने कहा कि यह दुष्प्रचार प्रायोजित था। पाकिस्तान और कुछ अन्य देशों ने इस दुष्प्रचार को सतत रूप से बढ़ावा दिया। भारतीय बुद्धिजीवी वर्ग का ...
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