पटना, फरवरी 1 -- राज्य सरकार के निर्णय के तहत एक फरवरी से बिहार में भूमि विवाद से जुड़े मामलों में पुलिस की भूमिका सीमित हो गई है। भूमि विवादों के समाधान को पूरी तरह राजस्व एवं न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में होगा। इससे आमजनों को अनावश्यक पुलिस हस्तक्षेप, दबाव या भ्रम की स्थिति का सामना नहीं करना होगा। नए प्रावधान के अनुसार, भूमि विवाद की सूचना मिलते ही थाने की स्टेशन डायरी में अलग एवं विस्तृत प्रविष्टि अनिवार्य होगी। दोनों पक्षों का नाम-पता, विवाद का स्वरूप (राजस्व/सिविल/आपसी), भूमि का पूरा विवरण (थाना, खाता, खेसरा, रकबा, किस्म) दर्ज करना होगा। यह भी उल्लेख करना होगा कि मामला प्रथमदृष्टया किस राजस्व न्यायालय के क्षेत्राधिकार में आता है। प्रत्येक मामले की लिखित सूचना संबंधित अंचलाधिकारी को देना अनिवार्य होगा। सूचना ई-मेल/पोर्टल से भी दी जा...
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