नई दिल्ली, जनवरी 9 -- सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि नाबालिग के खिलाफ यौन उत्पीड़न मामलों में जमानत मिलने के बाद साक्ष्यों से छेड़छाड़ या गवाहों को प्रभावित करने की संभावना एक वास्तविक और गंभीर चिंता का विषय है। शीर्ष अदालत ने एक नाबालिग से हथियार का भय दिखाकर बार-बार यौन उत्पीड़न करने के मामले में आरोपी युवक को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मिली जमानत रद्द करते हुए यह टिप्पणी की। जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और आर. महादेवन की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि पीड़ित की सुरक्षा और ट्रायल प्रक्रिया की पवित्रता बनाए रखने की आवश्यकता सर्वोपरि है। पीठ ने कहा कि जमानत याचिका का आकलन करते समय, अदालत अपराध की प्रकृति और गंभीरता और जांच के दौरान इकट्ठा किए गए सबूतों पर उचित ध्यान देने के लिए बाध्य है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मौजूदा मामले में जहां जमानत देने का...