नई दिल्ली, जून 7 -- माहौल से मन बनता है। जो लोग अपने मनमाफिक कामयाब नहीं हो पाते हैं, वे अक्सर कहते हैं कि मुझे सही माहौल नहीं मिला। वाकई, प्यार-स्नेह का परिवेश मिले, तो बच्चे एक-दूजे के प्रति संवेदना के साथ बड़े होते हैं और अगर कहीं दिन-रात कट्टरता की कांव-कांव ही हासिल हो, तो फिर समाज में मार-काट मचाने को तैयार पीढ़ियों का बोलबाला हो जाता है। सौभाग्य की बात है कि उस अमेरिकी बालक को घर में पढ़ने-लिखने का अच्छा माहौल मिला था। एक दिन ग्यारह साल के उस बालक ने गौर किया कि सारे लोग एक अखबार में छपी खबर को बार-बार पढ़कर चर्चा कर रहे हैं। खुशी मना रहे हैं, कह रहे हैं कि क्रांति हो गई। बगैर किसी तार के एक आवाज दुनिया के एक कोने से दूसरे कोने तक पहुंच गई। कोई मारकोनी नाम के वैज्ञानिक हैं, जिन्होंने अपनी प्रयोगशाला से एक संदेश भेजा और उसे 3,500 कि...
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