नैनीताल, फरवरी 18 -- उत्तराखंड हाईकोर्ट ने समान नागरिक संहिता के तहत लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीयन को अनिवार्य करने को चुनौती देने वाली याचिका पर सवाल उठाया है। कोर्ट ने पूछा है कि जब जोड़े बिना शादी के बेशर्मी से साथ रह सकते हैं तो इसका रजिस्ट्रेशन कराने में निजता का हनन कैसे हो सकता है। मुख्य न्यायाधीश जी.नरेंदर और जस्टिस आलोक मेहरा की खंडपीठ ने राज्य में लिव-इन रिलेशनशिप के अनिवार्य रजिस्ट्रेशन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए पूछा, 'आप समाज में रह रहे हैं, दूर किसी जंगल की गुफा में नहीं'। पड़ोसियों से लेकर समाज तक, लोगों को आपके रिश्ते के बारे में पता है और आप शादी किए बिना बेशर्मी के साथ रह भी रहे हैं। फिर लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीयन आपकी निजता का हनन कैसे कर सकता है?' याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में यह याचिका उत्तराखंड समान ना...
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