हरिद्वार, फरवरी 22 -- आरएसएस धर्म जागरण के प्रांत कार्यकारिणी सदस्य ऋतुराज ने समाज और राष्ट्र की दिशा पर मंथन किया। उन्होंने कहा कि जब-जब देश और समाज पर संकट आया, संतों और महापुरुषों ने नई राह दिखाई। दयानंद बस्ती, रामनगर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के हिंदू सम्मेलन में उन्होंने कहा कि जब-जब कुरीतियां बढ़ीं, संतों ने आगे आकर नेतृत्व संभाला और समाज को संगठित किया। आज पश्चिमी प्रभाव के कारण हम अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों से दूर होते जा रहे हैं। राजनीतिक आजादी मिल चुकी है, लेकिन वैचारिक स्वतंत्रता अभी अधूरी है। ऋतुराज ने कहा कि सबसे बड़ा संकट बाहरी नहीं, बल्कि घर के भीतर है। तकनीक और सुविधाएं बढ़ी हैं, पर संस्कार कमजोर हुए हैं। संयुक्त परिवार बिखर रहे हैं और संवाद की जगह आभासी दुनिया ने ले ली है। अधिवक्ता राजकुमार और संजीव बाली ने संय...