हल्द्वानी, फरवरी 17 -- -सीखने की कोई उम्र नहीं होती, बस इरादे नेक होने चाहिए वरिष्ठ संवाददाता। हल्द्वानी। आमतौर पर बच्चे अपने माता-पिता से सीखते हैं, लेकिन हल्द्वानी की निरजा बोरा की कहानी कुछ अलग है। अपनी जज बेटी की कामयाबी से प्रेरित होकर निरजा ने 50 की उम्र के बाद 'काला कोट' पहनने का फैसला किया। कोविड की चुनौतियों को पार करते हुए उन्होंने 2025 में अपनी डिग्री पूरी की और आज उत्तराखंड बार काउंसिल चुनाव में पहली बार मतदान किया। उनका यह सफर उन तमाम महिलाओं के लिए एक मिसाल है जो उम्र का हवाला देकर अपने सपनों को अधूरा छोड़ देती हैं। निरजा बोरा ने साबित कर दिया कि अगर हौसलों में उड़ान हो, तो आसमान छूने के लिए कोई भी उम्र देरी वाली नहीं होती। फोटो: 20
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