पूर्णिया, जनवरी 26 -- बैसा, एक संवाददाता। प्रखण्ड क्षेत्र के अनगढ़ हाट की पावन भूमि पर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ किया गया। श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिवस संस्थान के संस्थापक व संचालक आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी मेरुदेवा भारती ने देवराज नारद के पूर्व जन्म का वर्णन करते हुए बताया कि एक दासीपुत्र होकर भी सत्संग, संत-संगति और भगवत्-श्रवण के प्रभाव से नारद जी परम भक्त बने। यह प्रसंग इस बात का जीवंत उदाहरण है कि जन्म नहीं, संस्कार और संगति ही जीवन की दिशा तय करते हैं। भक्ति साधारण मानव को भी महान बना देती है। इसके लिए संगति महत्वपूर्ण है आप जैसी संगति करते है आप के अंदर वैसा ही संस्कार जन्म लेता है और आप वैसे ही बन जाते है। उन्होंने कहा श्रीमद्भागवत कथा केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है जो मनुष्य को अहंकार से ...