वाराणसी, फरवरी 6 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। भारतीय ज्योतिष में कुंडली (जन्मपत्री) को व्यक्ति के जीवन का खाका माना जाता है। कुंडली निर्माण एवं फलादेश की कक्षा जन्म-समय, स्थान और तिथि के आधार पर ग्रहों की स्थिति (लग्न, राशि, नक्षत्र) को 12 भावों में सटीक रूप से स्थापित करना सिखाती है। उक्त बातें दशाश्वमेध स्थित शास्त्रार्थ महाविद्यालय में कुंडली निर्माण एवं फलादेश प्रशिक्षण कार्यशाला में शुक्रवार को संयोजक डॉ.पवन कुमार शुक्ला ने कहीं। उन्होंने कहा कि यह शिक्षा इष्टकाल, लग्न स्पष्ट, दशा-अन्तरदशा और अष्टकवर्ग की गणना के माध्यम से जीवन के सुख-दुःख, कॅरियर, विवाह और स्वास्थ्य का विश्लेषण करना सिखाती है। इसका उद्देश्य जातक के भविष्य का सटीक पूर्वानुमान लगाना है। इस कक्षा में छात्र एवं जिज्ञासु कुंडली बनाने की मूलभूत वैज्ञानिक और पारंपरिक विधिय...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.