गिरडीह, जनवरी 28 -- पीरटांड़, प्रतिनिधि। आदिवासी समाज की संस्कृति परंपरा से इतर जतरा मेला को लेकर हमेशा मतभेद रहा है। आरोप है कि जतरा मेला तथाकथित लोगों का कमाई का जरिया बन गया है। मेला के आयोजन को लेकर प्रशासनिक स्वीकृति भी नहीं मिलती है। जतरा मेला हमेशा से घटना दुर्घटनाओं का कारण रहा है। समाज के कुछ वर्ग मेला को लेकर कोई सरोकार नहीं रखता है। बताया जाता है कि जतरा मेला में आदिवासी संस्कृति परम्परा से कोई सरोकार नहीं है। मेला को लेकर समाज में हमेशा मतभेद अथवा विरोध के स्वर उठते रहे है। जतरा मेला परंपरा संस्कृति से अलग मनोरंजन का साधन भी माना जाता रहा है। लगभग दस वर्ष पूर्व हरलाडीह में आयोजित जतरा मेला में आयोजक को विरोध का दंश झेलना पड़ा था। जानकारी के अनुसार वर्ष 2012 में आयोजित जतरा मेला में माओवादियों द्वारा विरोध दर्ज कराया गया था। जानक...