भभुआ, मार्च 18 -- कभी घर के आंगन तो कभी छत के मुड़ेरों पर फुदकती दिखती हैं गौरैया घर के छान-छप्पर, रोशनदान व पेड़ों पर बने घोंसलों में करती हैं निवास (पेज चार की फ्लायर खबर) अधौरा, एक संवाददाता। प्रखंड का अधिकतर हिस्सा जंगल व पहाड़ से घिरा है। इन्हीं जंगल व पहाड़ों में गांव बसे हैं। इन घरों के आंगन, छत के मुड़ेरों, रोशनदान, छान-छप्पर के आसपास रोजाना सैकड़ों गौरैया फुदकती व चीं-चीं करतीं दिखती व सुनी जाती हैं। इनके घोसले न सिर्फ पेड़ बल्कि रोशनदान व छप्परों में बने दिखते हैं। मादा गौरैया इसी में अंडा देती और उसे संरक्षित करती हैं। बाद में फोड़ती हैं, तो उसमें से बच्चे निकलते हैं। नर-मादा गौरैया मिलकर बच्चों को दाना चुगना व उड़ना सिखाते हैं। अधौरा के रामदुलार सिंह, बड़गांव कला के जोखु यादव, बड़गांव खुर्द के बबन यादव, चोरपनिया के वीरेंद्र सिंह, डुमरावा...
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