गंगापार, जनवरी 3 -- भीषण गलन और ठंडी गरीबों के लिए अभिशाप जैसा प्रतीत होता है। तमाम परिवारों के बड़े, बुजुर्गों के साथ मासूम बच्चे भी जंगल से बीन कर लकड़ी लाते हैं, तब उनके घर के चूल्हे जलते हैं। जनपद मुख्यालय से 70 किमी दूर दक्षिणी पहाड़ी भूभाग में बसे मांडा उपरौध क्षेत्र के ज्यादातर गांवों में अभी तक विकास की किरणें समुचित रुप से नहीं पहुंच पायी हैं। इन गांवों के दलित बस्तियों में तमाम परिवारों के चूल्हे उज्ज्वला योजना से नहीं, बल्कि आसपास के जंगलों से एकत्रित की गयी सूखी लकड़ियों से जलते हैं। इन दिनों भीषण शीतलहरी में भी बड़े, बूढ़ों के साथ वे बच्चे भी जंगलों में लकड़ी बीनने जाते हैं , जिनको स्कूलों में शिक्षा ग्रहण करने जाना चाहिए। क्षेत्र के बदौआ गाँव के तमाम बच्चे सुबह से दोपहर तक जंगल से लकड़ी बीन कर प्रतिदिन घर लाते हैं, तभी घरों ...