रांची, फरवरी 7 -- रांची, संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने पारिवारिक विवाद से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में पत्नी की अपील स्वीकार करते हुए फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए तलाक के आदेश को रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट ने सरायकेला-खरसावां फैमिली कोर्ट के फैसले को गलत ठहराते हुए कहा कि छोटे-मोटे मतभेद तलाक का आधार नहीं हो सकते। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस एके राय की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि विवाह स्वीकार्यता, समायोजन और सहनशीलता पर आधारित संस्था है। फैमिली कोर्ट ने पत्नी के बयानों और सुलह की इच्छा को नजरअंदाज कर गंभीर त्रुटि की थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि मानसिक क्रूरता साबित करने के लिए लगातार और गंभीर प्रकृति के व्यवहार का ठोस प्रमाण होना आवश्यक है। सामान्य वैवाहिक झगड़े, मामूली मतभेद या पारिवारिक खटपट को क्रूरता नहीं माना जा सकता। ऐसे क...