मेरठ, अगस्त 27 -- आधुनिक विज्ञान में परमाणु सिद्धांत से जुड़े जॉन डाल्टोन एवं अर्नेस्ट रुथेरफोर्ड से पहले भारत में परमाणु सिंद्धात बताने वाले महर्षि कणाद को भी देशभर के छात्र स्नातक केमेस्ट्री पाठ्यक्रम में पढ़ेंगे। प्राचीन भारत में धातु निष्कर्षण की तकनीक और आयुर्वेद में भस्म बनाने की प्रक्रिया जैसे सूक्ष्म विषयों को जानकर छात्र आुधनिक विज्ञान की सीढ़ियां चढ़ेंगे। आयुर्वेद एवं सिद्धा में पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के प्रयोग से विभिन्न औषधियों की निर्माण प्रक्रिया समझेंगे। प्राचीन भारत में धातु विज्ञान और प्राचीन रसायन विज्ञान प्रयोगशालाएं, भट्टी एवं अन्य उपकरणों को भी छात्र पढ़ेंगे। प्राचीन और अद्यतन भारत में विज्ञान की इस यात्रा को रसायन विज्ञान के प्रस्तावित पाठ्यक्रम में जगह मिली है। यूजीसी ने इसके लिए यूजी एवं पीजी दोनों स्तर पर के...
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