मुरादाबाद, जुलाई 19 -- व्हाइट हाउस में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में दूसरे दिन कथा व्यास संजय कृष्ण सलिल जी ने कहा मानव देह चौरासी लाख योनियों के बाद प्राप्त होता है। यह प्रत्येक क्षण प्रभु का स्मरण करने के लिए मिला है। यही इस जीवन का उद्देश्य है। अन्य क्रियाएं तो पशु पक्षी भी कर सकते हैं। मगर उनमें विवेक नहीं होता। इस जन्म का लाभ यही है कि अंत समय में नारायण की स्मृति बनी रहे। उन्होंने कहा हमें मृत्यु का याद करते रहना चाहिए। उन्होंने कहा हमें अपने खान पान एवं व्यवहार आदि का भी ध्यान रखना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से ही हृदय शुद्ध होता है। शुद्ध हृदय होने पर ही प्रभु की कृपा होती है। उन्होंने राजा परीक्षित की कथा सुनाते हुए कहा उसे मृत्यु का भय था। राजा सब कुछ त्याग कर गंगा तट पर आते हैं। ऋषि मुनि भी आते हैं। शुकदेव जी राजा को भागवत कथा सुनात...
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