गंगापार, अगस्त 28 -- हर साल बाढ़ व कटाव की विभीषिका पर किसान खून के आंसू रोने को मजबूर हो जाते हैं। किसानों की आंखों में बाढ़ का दर्द साफ साफ दिखाई देता है। किसान बड़ी मेहनत से अपनी खून पसीना बहाकर खेतों में फसल लगाते हैं। हर साल गंगा के पानी की चपेट में किसानों की फसल बर्बाद हो जाती है। इस बार एक माह में चार बार गंगा की बाढ़ आई है, जिसका खामियाजा हजारों किसानों को भुगतना पड़ रहा है। समय से पहले पानी आ जाने से कछार में बोई गई खरीफ़ की फसल बर्बाद हो गई । किसानों को उम्मीद थी कि इस बार कम लागत में अधिक पैदावारी होगी। लेकिन बाढ़ ने किसानों के मंसूबे पर पानी फेर दिया। बाढ़ के चलते किसान पूरी तरह बेरोजगार हो गए हैं।किसान अपनी फसल की गाढ़ी कमाई से बिटिया की शादी से लेकर बच्चों की उच्च शिक्षा को लेकर विचार करते हैं। लेकिन इस बार समय से पहले सब्जी क...
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