नई दिल्ली, फरवरी 24 -- वस्तु, व्यक्ति और क्रिया- ये तीन चीजें दिखने में आती हैं। इनमें वस्तु तथा क्रिया- ये दोनों प्रकृति हैं और व्यक्ति रूप में जो दिखता है, यह शरीर भी प्रकृति ही है, परंतु इसके भीतर में जो न बदलने वाला है, यह परमात्मा का अंश है। अब अगर 'यह' वस्तु, क्रिया और व्यक्ति में नहीं उलझे, तो यह स्वाभाविक ही मुक्त है; क्योंकि 'यह' परमात्मा का साक्षात अंश है। इसके लिए कहा है- 'चेतन अमल सहज सुख रासी।' यह चेतन है, शुद्ध है, मलरहित है और सहज सुख राशि है, महान आनंद राशि है। यह महान आनंद राशि अपने स्वरूप की तरफ ध्यान न देकर संसार के संबंध से सुख चाहने लग गया। इससे यही भूल हुई है। यह संयोग जन्य सुख में फंस गया। जैसे, धन मिले, तो सुख हो। भोजन मिले, तो सुख हो। भोग मिले, तो सुख हो। कपड़ा, वस्तु, आदर, मान, सत्कार मिले, तो सुख हो। यह बड़े आश्...