सहरसा, दिसम्बर 29 -- सिमरी बख्तियारपुर, निज संवाददाता। शिव शिष्य सिमरी बख्तियारपुर के तत्वावधान में आयोजित "शिव शिक्षा की आध्यात्मिक बैठक" में शिव तत्व, गुरु-शिष्य परंपरा और आत्मबोध के महत्व पर गहन विचार-विमर्श किया गया। बैठक के मुख्य वक्ता ललन एवं डोमी ने शिव शिक्षा के दर्शन और उसके व्यावहारिक पक्ष पर विस्तार से प्रकाश डाला। संबोधन में कहा कि शिव कोई सीमित देहधारी सत्ता नहीं, बल्कि चेतना और ज्ञान का प्रतीक हैं, जो प्रत्येक व्यक्ति के भीतर विद्यमान है। शिव शिक्षा मनुष्य को अपने भीतर झांकने, अहंकार त्यागने और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। शिव गुरु का कार्य केवल उपदेश देना नहीं, बल्कि शिष्य को जीवन की कसौटी पर परखना भी होता है। दुख, संघर्ष और कठिन परिस्थितियां ही शिष्य की वास्तविक परीक्षा हैं। जो व्यक्ति इन परीक्षाओं में संयम, ध...