नई दिल्ली, दिसम्बर 19 -- नई दिल्ली। विशेष संवाददाता सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि 'उच्च न्यायालय चेक बाउंस की शिकायत से जुड़ी आपराधिक कार्यवाही को प्री-ट्रायल के चरण में रद्द नहीं कर सकती।' शीर्ष अदालत ने पटना उच्च न्यायालय के एक फैसले को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की है, जिसमें चेक बाउंस के मामले को प्री ट्रायल चरण में ही रद्द कर दिया गया था। जस्टिस मनोज मिश्रा और उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने अपने फैसले में कहा है कि 'उच्च न्यायालय द्वारा मामले की विवादित तथ्यों प्री-ट्रायल जांच करके चेक बाउंस मामले से जुड़े आपराधिक कार्यवाही को रद्द करना पूरी तरह से अनुचित और गलत है, खासकर जब नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 की धारा 139 के तहत एक कानूनी अनुमान शिकायतकर्ता के पक्ष में काम करता हो।' पीठ ने कहा है कि 'हमारा मानना है...
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