नई दिल्ली, फरवरी 5 -- सुप्रीम कोर्ट ने चुनावों में 'मुफ्त उपहार' की घोषणा या वादा करने वाले किसी दल का चुनाव चिह्न जब्त करने अथवा उसका पंजीकरण रद्द करने के निर्देश संबंधी जनहित याचिका को मार्च में सूचीबद्ध करने पर गुरुवार को सहमति जताई। याचिकाकर्ता एक वकील ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ को बताया कि उनकी जनहित याचिका पर केंद्र और निर्वाचन आयोग को 2022 में ही नोटिस जारी किए थे और उन्होंने अदालत से मामले को जल्द सूचीबद्ध करने का आग्रह किया। वकील ने कहा कि सूरज और चांद को छोड़कर चुनाव के दौरान राजनीतिक दल मतदाताओं से हर चीज का वादा करते हैं और यह भ्रष्टाचार का एक उदाहरण है।
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