नई दिल्ली, जनवरी 16 -- संजय कुमार,चुनाव विश्लेषक महाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव नतीजों ने एक जटिल राजनीतिक परिदृश्य को जन्म दिया है। यहां हर कोई एक-दूसरे का सहयोगी था और विरोधी भी। बेशक, इन चुनावों में भाजपा-शिंदे सेना महायुति को बड़े पैमाने पर जीत मिली है, लेकिन शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) का चुनाव में मिलकर उतरना उल्लेखनीय था, जबकि ये दोनों दल दशकों से एक-दूसरे के कट्टर विरोधी रहे हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस ने भी, जो कभी महाविकास अघाड़ी में सहयोगी के रूप में उद्धव ठाकरे की शिवसेना की साझेदार थी, अलग रास्ता चुना और वंचित बहुजन अघाड़ी का हाथ थामने का फैसला किया। कुछ जगह पर तो उसके स्थानीय नेताओं ने भाजपा से भी समझौता कर लिया। अब जबकि नतीजों का एलान हो चुका है और ठाकरे बंधुओं को बड़ी हार मिली है, तो सवाल यह उठ ...