नई दिल्ली, दिसम्बर 8 -- मनुष्य पतन के मार्ग पर कब चला जाता है? यह सवाल बहुत लोगों को मथता है। दरअसल, मनुष्य का पतन तभी आरंभ हो जाता है, जब वह अपनी आत्मा के अविनाशी स्वरूप की उपेक्षा कर भोग और भौतिक लालसाओं को जीवन का लक्ष्य बना लेता है। संसार में आपको ऐसे अनेक लोग मिल जाएंगे, जो ब्रह्म के अस्तित्व को मानने का दावा करते हैं, आत्मा पर चर्चा करते हैं, किंतु क्षणिक सुखों के पीछे भागते रहते हैं। ऐसे लोग धीरे-धीरे प्रकाश से अंधकार और मनुष्य से पशुवृत्ति की ओर बढ़ते चले जाते हैं। प्रश्न उठता है कि जब परमात्मा अनंत और शुद्ध है, तब व्यक्ति की विकृत धारणाएं कहां से उत्पन्न होती हैं? मनुष्य की मूल प्रवृत्ति है- सीमित से अनंत और अंश से पूर्णता की ओर अग्रसर होना। सुख की तलाश इसी प्रवृत्ति से जन्म लेती है। जब तक जीवन का लक्ष्य अनंत नहीं होता, तब तक शाश...