नई दिल्ली, जनवरी 1 -- हिंदू धर्म में बेहद पवित्र चिह्न हैं। इन्हीं में से एक है स्वास्तिक। किसी भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ या भी त्योहारों में सबसे पहले स्वास्तिक बनाने की परंपरा है, जो सनातन धर्म में सदियों से चली आ रही है। लेकिन इसे कई चीजों से बनाया जाता है। साथ ही इसे बनाने के नियम भी हैं। चलिए जानते हैं कि इसका क्या महत्व है और इस चिह्न को क्यों बनाया जाता है? स्वास्तिक शब्द संस्कृत के 'सु' (शुभ) और 'अस्ति' (होना) से मिलकर बना है, जिसका मतलब है शुभ होना। यह चार दिशाओं और चार तत्वों (अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी) का प्रतीक है। वास्तु और ज्योतिष में इसका खास महत्व होता है। ऐसे में इसे शक्ति, समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना गया है। मान्यता है कि यह हमारे घर में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा शक्ति को बाहर कर सकारात्मक ऊर्जा लाता है। ऐसा कहा जाता है कि ...
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