लखनऊ, फरवरी 15 -- वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों में सत्ता बचाए रखने की कवायद में जुटी भाजपा दलित वोटरों को लेकर खासी फिक्रमंद है। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनावों में दलित वोटरों के विपक्षी दलों की तरफ चले जाने के बाद से ही पार्टी नए सिरे से सोशल इंजीनियरिंग में जुट गई है। भाजपा की रणनीति के केंद्र में दलित महापुरुष, उनकी विरासत और समाज के लोगों से सतत संवाद है। पार्टी ने कांशीराम, संत रविदास, संत गाडगे, डॉ. भीमराव अंबेडकर, ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले, उदा देवी, झलकारी बाई, वीरा पासी, लखन पासी, रमाबाई अंबेडकर और अहिल्याबाई होल्कर जैसी करीब 15 दलित और वंचित समाज के महापुरुषों का एक वार्षिक कैलेंडर तैयार किया है। इन महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि पर प्रदेश भर में कार्यक्रमों की शृंखला तैयार की गई है। मकसद है कि इन आयोजनों के बहाने बार-बार ...
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