नई दिल्ली, दिसम्बर 16 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय द्वारा दुष्कर्म के आरोपी बुजुर्ग के घर को गिराने की कार्रवाई पर रोक के गहरे अर्थ हैं। अदालत ने इतनी सर्दी में किसी घर को गिराने के कदम को उचित ही अमानवीय माना है। वैसे भी, अवैध रूप से निर्मित इमारतों को गिराने के तय कायदे-कानून हैं, जिनके पालन में चूक नहीं होनी चाहिए। गौरतलब है, मई में नैनीताल में घटी दुष्कर्म की उस घटना के बाद इलाके में सांप्रदायिक तनाव फैल गया था और उग्र भीड़ ने कई दुकानों व रेस्तरां में जमकर तोड़-फोड़ कर दी थी। स्थानीय नगरपालिका परिषद ने तब आनन-फानन में आरोपी के घर पर अवैघ रूप से बने होने का नोटिस चस्पां कर उसे तीन दिन में खाली करने की चेतावनी जारी की थी, ताकि उसे गिराया जा सके, मगर हाईकोर्ट के हस्तक्षेप से उस समय भी प्रशासन को अपनी कार्रवाई रोकनी पड़ी। नगरपालिका परिषद क...