नई दिल्ली, फरवरी 20 -- नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। हाईकोर्ट ने एक मामले में व्यवस्था दी कि किसी के घर के बगल में सार्वजनिक यूरिनल व कूड़ेदान का होना स्वच्छ व स्वस्थ वातावरण में गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार का उल्लंघन है। न्यायमूर्ति अमित बंसल की पीठ ने कहा कि स्वच्छ वातावरण स्वस्थ जीवन का एक अभिन्न अंग है। स्वस्थ वातावरण का अभाव गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार को बाधित करता है। पीठ ने यह आदेश एक वकील की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया, जिसमें उसने अपनी संपत्ति की पूर्वी दीवारों पर अनधिकृत रूप से बनाए गए खुले कूड़ेदान व यूरिनल के खिलाफ दाखिल की थी। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि उसके पड़ोस के लगभग 150 निवासी उक्त स्थान पर अपना कूड़ा फेंकते है। कूड़ेदान व यूरिनल के पास स्वच्छता बनाए रखने के लिए एमसीडी अधिकारियों से कई बार अनुरोध किया गया,...
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