गोरखपुर, मार्च 9 -- गोरखपुर, कार्यालय संवाददाता। घरेलू हिंसा में पूर्वांचल और बिहार की महिलाओं के कान के पर्दे खराब हो रहे हैं। इसे ठीक करने के लिए सर्जरी (टिम्पेनोप्लास्टी) करनी पड़ रही है। एम्स के नाक, कान एवं गला रोग विभाग की ओपीडी में आने वाली महिलाओं की जांच में यह खुलासा हुआ है। एम्स के नाक, कान एवं गला रोग विभाग की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 300 मरीज इलाज के लिए आते हैं। जांच के दौरान इनमें 10 से 15 फीसदी के कान के पर्दे खराब मिलते हैं। इस तरह महीने भर में करीब एक हजार मरीजों में कान के पर्दे की समस्या पाई गई। इनमें महिलाओं का संख्या 10 से 12 फीसदी रहती है। डॉक्टरों के अनुसार, बातचीत के दौरान पता चलता है कि हर महीने औसतन पांच से सात महिला मरीज ऐसी हैं, जिनके कान के पर्दे घरेलू हिंसा में खराब हुए हैं। इनमें बिहार की महिलाओं की संख्या त...
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