वाराणसी, दिसम्बर 29 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। घर, कपड़ा छोड़ना भक्ति नहीं है। न ही मंदिर में जाकर पूजा करना भक्ति है। इसका सीधा अर्थ तो भगवान से सच्चा प्रेम करना है। ये बातें डॉ. उमाशंकर त्रिपाठी ने कही। वह शिवपुर स्थित रामलीला मैदान में हो रही श्रीमद्भागवत कथा में रविवार को प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भगवान के प्रति सच्चा प्रेम मनुष्य तभी कर सकता है जब वह अपने अंदर के अवगुणों को त्याग देता है। संसार में भगवान को पाने के लिए भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और त्याग सर्वोपरि होना चाहिए। यह सद्गुण मानव को श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से सहज ही प्राप्त हो सकते हैं। भागवत कथा सुनने से मनुष्य के हृदय में भक्ति जागृत होती है। भक्ति से ज्ञान, ज्ञान से मनुष्य वैराग्य धारण करता है। अंत में वह त्याग पर पहुंचता है। इसके बाद उसे वास्तव में प्रभु की शरणाग...