नई दिल्ली, जुलाई 8 -- नई दिल्ली, मंजुल पॉल/प्रज्ञा श्रीवास्तव। दुनिया के सबसे बड़े विकासशील देशों के समूह ब्रिक्स-प्लस ने खुद को जी-7 के विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश की है, लेकिन आपसी मतभेद इसकी सबसे बड़ी कमजोरी है। ब्रिक्स-प्लस देशों के पास संसाधन, जनसंख्या और आर्थिक क्षमता है, लेकिन साझा दृष्टिकोण की कमी के चलते यह समूह 'ग्लोबल साउथ की आवाज बनने से चूक रहा है। ब्रिक्स-प्लस, ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) के साथ-साथ अन्य देशों के एक विस्तारित समूह को कहते हैं। ब्रिक्स ने हाल ही में मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों को भी जोड़ा है। फीकी रही ब्रिक्स की शुरुआत 17वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन जी-7 का विकल्प बनने और ग्लोबल साउथ की आवाज उठाने की ब्रिक्स देशों की कोशिशों का हिस्सा है। ल...
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