संजय कुमार, मई 3 -- ग्लोबल वार्मिंग का कहर इस बार कोसी नदी पर पड़ना तय है। नेपाल के उत्तर गोसाईं थान चोटी से जन्मी कोसी का अंत भागलपुर से सटे कटिहार के कुरसेला में होता है। यहां गंगा में मिलकर झारखंड-बंगाल के रास्ते समुद्र में समा जाती है। पहली बार वैशाख की तपिश में कोसी प्यासी दिख रही है। कुरसेला के पास नदी के वेग (फ्लो) में कमी आ गई है। इस वजह से यहां नदी नाला का रूप लेती दिख रही है। कोसी में भारी मात्रा में गाद होने से नवगछिया के मदरौनी से पानी के फ्लो में कमी आ गई है। इससे कुरसेला सड़क पुल के नीचे मुख्य धार के बीच डेल्टा (टापू) बनता दिख रहा है। यहां के मछुआरे बताते हैं, वैशाख में यह हाल है। अभी जेठ-आषाढ़ की गर्मी बाकी है। मछुआरे पवन सहनी, महेश मंडल आदि बताते हैं, कोसी में कम बहाव से गंगा नदी भी झारखंड के साहिबगंज में छिछली दिखने लगेगी। इ...
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